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राष्ट्रवाद का महा विस्फोट है अहं ब्रह्मास्मि



फ़िल्म अहम ब्रह्मास्मि के प्रदर्शन का आज दूसरा दिन।ऐसा लगता है कि देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी और पाप-ताप-संताप हारिणी गंगा अपने मूल से मिलने के लिए व्याकुल है।गंगा की उफनती हुई लहरों में अहम ब्रह्मास्मि का उद्घोष हो रहा है, वहीं पूरी काशी नगरी हर हर महादेव और जयतु जयतु संस्कृतम के उच्चारों से वैदिक काल का वातावरण पैदा कर रही है।अहम ब्रह्मास्मि को जो जनसमर्थन और दर्शकों का प्रतिसाद मिल रहा है उससे ऐसा लगता है कि हज़ारों साल की ग़ुलामी और धर्म-संस्कृति के चिर शत्रुओं ने भी भारत को अपनी जड़ों से काट नहीं पाया है।कबिलाई आक्रांताओं और स्वदेशी शत्रुओं के सारे षड्यंत्र मंद पड़ गए।