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ढाई अक्षर मे पूरी सृष्टि है, संस्कृत महानायक महर्षि आज़ाद

International News Bureau

Mumbai 9/1/2021 :


वेद के ब्रह्म वाक्य अहं ब्रह्मस्मि का विश्व पटल पर शंखनाद करने वाले संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय राजदूत व महानायक महर्षि आज़ाद ने कहा कि ‘पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय, ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय’ ये दोहा रूपी मुहावरा सदियों ये सनातन भारत मे कहा जा रहा है, आख़िर इसका मतलब क्या है।